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सोमवार, मार्च 24, 2025

जीवन की हकीकत (कविता)


जीवन की हकीकत (कविता)

मुसीबते तो यूँ आती रहती है, जीता वही जो डट के खड़ा है। आँधियों से पाला पड़ा कई बार, वो हर बार ये जंग लड़ा है।।

सच कहने वाले तो बहुत है मगर, हर एक सच कठघरे में खड़ा है।
साबित करने के लिए चाहिए दलीले बहुत, यहाँ झूठ सीना तान के खड़ा है।।

सफेदपोश समाजसेवी बन बैठे, जिनके दहलीज मे कालाधन गड़ा है।
बाते तो भलाई की करते है अक्सर, मगर जहन मे कूड़ा भरा पड़ा है।।

गरज पर मिश्री जैसे मीठे लोग, पीठ पीछे राई का पहाड़ खड़ा है।
कड़वा सच कहते है मुँह पर, हकीकत मे वो दिल का बड़ा है।।

अपने मुँह मिंया मिठु बनने से क्या, वो दामन जो लगे हीरों से जड़ा है।
 असलियत को छुपा लो कितना भी, मुखौटा हकीकत लिए पड़ा है।।

दिखावे की दुनिया में मची है होड़, नकली शान मे कौन किससे बड़ा है।
आधुनिकता की आड़ मे रिश्ते तार तार, पूरी तरह से भर गया पाप का घड़ा है।।

मत कर घमण्ड इतना ए हरीश, ये शरीर तो माटी का टुकडा है। एक दिन मिल जाना है इसी मे, तो फिर क्यो तेरी मेरी पे अड़ा है।।
Hameer shing prajapat 


_ हमीर सिंह प्रजापत 

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